जीवित हैं साहब
जब तक जिन्दा हैं तब तक ही हम दौड़ते रहते हैं। क्यों की लोग क्या कहेंगे, हमारे पीछे वाला हमें पीछे छोड़ देगा, लेकिन अगर इस दौड़ते दौड़ते अगर आप मर गए तो तो लोग तीन दिन बाद आप को भूल जायेंग। हमारा समाज भूलने में बड़ा माहिर है। और ये भूलने की आदत ही इसकी रचनातमकता है, क्यों भूलकर ही आगे बढ़ा जा सकता है , क्यों की जिंदगी बड़ी है और भूलकर ही आगे बढ़ी है, तो आज आप भी भूल जाईये साड़ी भागदौड़, क्यों की आज संडे है , और जो आज आपके साथ है अभी आपके पास है उसे कुछ वक़्त दीजिये अकेले हैं तो खुद को वक़्त दीजिये या फिर कोई ढूंढ लीजिये । वर्ना फिर गाते रहिएगा "अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें जिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिलें"।
और आज के आज आप आगरा ताजमहल देखने नहीं जा सकते पर नेटफ्लिक्स की सीरीज है इसी नाम से अभी वक़त बचा है
https://www.youtube.com/watch?v=-q0RJBZKM6w&ab_channel=NetflixIndia
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